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दस्यु सुंदरी कुसमा नाइन की मौत पर घी के दीये क्यों जला रहे हैं इस गांव के लोग, वो खौफनाक दिन अब तक नहीं भूले

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Last updated: 2025/03/03 at 4:00 PM
news-admin 1 year ago

दस्यु सुंदरी कुसमा नाइन की मौत पर घी के दीये क्यों जला रहे हैं इस गांव के लोग, वो खौफनाक दिन अब तक नहीं भूले

दस्यु सुंदरी कुसमा नाइन ने साल 1984 में यूपी के औरैया सिले के अस्ता गांव में दिनदहाड़े 14 लोगों को गोली मार दी थी और पूरे गांव में आग लगा दी थी.

दस्यु सुंदरी कुसमा नाइन की मौत पर घी के दीये क्यों जला रहे हैं इस गांव के लोग, वो खौफनाक दिन अब तक नहीं भूले

कुसमा नाइन का नाम अब कम लोगों को याद होगा, लेकिन एक दौर ऐसा था जब उसके नाम से इलाके के लोग थर-थर कांपा करते थे. उसने साल 1984 में यूपी के औरैया सिले के अस्ता गांव में दिनदहाड़े 14 लोगों को गोली मार दी थी और पूरे गांव में आग लगा दी थी. 41 साल बाद जब उसने आख़िरी सांस ली तो सबने उसका वह खौफनाक दौर याद किया. अस्ता गांव के लोग अब घी के दीए जला रहे हैं. बता दें कि औरैया में यमुना नदी किनारे बसे इस बीहड़ को अब भी याद है 1984 का वह दिन, जब कुसमा नाइन अपने गिरोह के साथ यहां आई और बच्चों समेत कुल 14 लोगों को घर से बाहर निकाल कर उन सबको गोली मार दी. आतंक यहीं तक नहीं थमा, फिर पूरे गांव में आग लगा दी थी. वैसे एक चर्चा ये भी थी कि कुसमा नाइन ने फूलन देवी के बेहमई कांड का बदला लिया था हालांकि कुसमा के समर्थक दावा करते हैं कि कुसमा पर भी कुछ वैसे ही अत्याचार हुए थे, जैसे फूलन देवी के साथ हुए थे. गांववाले अब भी वह दिन याद करते हैं. उस सामूहिक नरसंहार कांड में मारे गए मृतकों की याद में एक चबूतरा बनाया हुआ है.

कुसमा नाइन की मौत के बाद आज इस गांव के लोग खुश हैं और घी के दीये जलाकर अपनी खुशियां मना रहे हैं, लेकिन आज भी उनके दिल में एक टीस भरी हुई है. साल 1984 में कुसमा नाइन ने मल्लाहों के गांव अस्ता में सामूहिक नरसंहार कांड को अंजाम दिया. दावा किया जाता है कि कुसमा नाइन ने सिर्फ फूलन देवी के बेहमई कांड से नाराज होकर नरसिंहगढ़ हत्याकांड को अंजाम दिया था हालांकि कुसमा के समर्थक दावा करते हैं कि कुसमा पर भी कुछ वैसे ही अत्याचार हुए थे, जैसे फूलन देवी के साथ हुआ था.

कुसमा ने मुझे 12 साल में ही विधवा कर दिया, बेटे को भी मार दिया- रामकुमारी

एक वृद्ध बुजुर्ग महिला रामकुमारी ने बताया कि हमारे परिवार में दो लोगों को गोली मारकर मौत के घाट उतारा था, जिसमें हमारे बांकेलाल पति और ससुर रामेश्वर को कुसमानाइन डकैत घर से पकड़कर ले गई और हमारे पति ससुर के साथ गांव के 14 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. कुसमा नाइन की मौत पर अच्छा लग रहा है, जिसने हमें बर्बाद कर दिया. हमारी शादी के 12 साल हुए थे. शादी के 12 वर्ष के बाद ही कुसमा ने हमें विधवा बना दिया. हमारे बेटे को भी छीन लिया, अब हमारे सिर्फ लड़कियां हैं.

हम खुश हैं कुसमा इस दुनिया से चली गई- प्रेमचंद

ग्रामीण प्रत्यक्षदर्शी प्रेमचंद ने बताया कि वह अस्ता गांव के रहने वाले हैं, जो फूलन देवी ने बेहमई कांड किया था, उसके बारे में हमें नहीं मालूम है, लेकिन उसका बदला लेने के लिए हमारे गांव में लालाराम और कुसमा नाइन ने एक दो बार मीटिंग भी की और वो लोग चुपके से आए. 14 आदमियों को उन्होंने दिनदहाड़े ढाई तीन बजे गोलियां मार दी. इसके बाद पूरे गांव में आग लगा दी.  ये सब देखकर हम लोग भाग गए. सुबह लौटकर आए तो सरकार ने अपने हिसाब से दाह संस्कार का काम किया. घी का दीये इसलिए जला रहे हैं कि हम खुश हैं कि कुसमा इस दुनिया से चली गई.

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कुसमा ने धोखे से लोगों को मार दिया

इसी तरह बुजुर्ग सोमवती ने बताया कि ऐसे ही बहला फुसलाकर लेकर चले गए कि भैया फैसला होगा, धोखे से ले जाकर मार डाला, वैसे कोई जाता नहीं. 13-14 लोगों की हत्या की थी. कुसमा खत्म हो गई, बहुत अच्छा लग रहा है. बहुत अच्छा रहा हम तो रोते हैं, ऐसे ही अगर वो रोती तो और अच्छा रहता. उसने तो हमें बर्बाद ही कर दिया.

मेरे पिता, ताऊ, चाचा को मिलाकर तीन पुरखे मारे गए थे- बलराम

गांव के ही बलराम ने बताया कि कुसमा नाइन खत्म हो गई है इसीलिए मुझे खुशी है कि मेरे पिता, ताऊ, चाचा को मिलाकर तीन पुरखा मारे गए थे. कुसमा लालाराम की साथी थी. फूलन ने जो बेहमई में नरसंहार किया था, लालाराम उसी गांव के ठाकुर थे. इसीलिए ये सब किया. सरकार ने हमारी कोई सुनवाई नहीं की. सपा बसपा बनी रही और फिर कांग्रेस आई बिल्कुल सुनवाई नहीं हुई. आज कुसमा की मौत की खबर मिलने की खुशी है, हम सभी लोग घी के दीपक जला रहे हैं. फिलहाल 41 साल बाद कुसमा नाइन भले चली गई, लेकिन उसकी मौत के बाद कोई खुशियां मना रहा है तो कोई ये मान रहा कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली एक दस्यु सुंदरी चली गई.

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