Friday, December 3, 2021
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Coronavirus: क्या कोविड-19 की दूसरी लेहर बच्चों के लिए है ज़्यादा ख़तरनाक? इन लक्षणों पर दें ध्यान

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Covid-19 2nd Wave & Kids: कई तरह की रिसर्च और शोध से पता चला है कि कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ज़्यादा शक्तिशाली और जानलेवा है, जो आसानी से प्रतिरक्षा सुरक्षा और एंटीबॉडी को पार कर सकता है। पहले ऐसा माना जा रहा था कि कोविड-19 सिर्फ वयसकों के लिए ही ख़तरनाक साबित होता है, लेकिन नए मामलों में स्कूल भी शामिल हैं। कुछ एपीडेमियोलॉजिस्ट का मानना है कि कोरोना का नया स्ट्रेन बच्चों को भी गंभीर रूप से संक्रमित कर सकता है।

यूके और ब्राज़ील की तरह भारत भी कोविड-19 की दूसरी लेहर से जूझ रहा है, जो नौजवानों के लिए सबसे भयानक मानी जा रही है। हाल ही में बैंगलोर के एक स्कूल में 400 बच्चे कोविड-19 पॉज़ीटिव पाए गए।

कोविड के नए रूप कितने ख़तरनाक हैं?

कोविड के नए रूप, फिर चाहे वह भारत में हाल ही में पाया गया डबल म्यूटेंट वैरिएंट हो, या फिर यूके और ब्राज़ील का हो, वायरस अब एंट्री रिसेप्टर्स पर आसानी से खुद को जोड़ लेता है और फिर खास सेल लाइनिंग को अटैक करना शुरू करता है।

इस वक्त जो बच्चे कोविड का शिकार हुए उन पर ज़्यादा रिसर्च नहीं की गई है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मनना है कि नए स्ट्रेन कहीं ज़्यादा संक्रामक हैं, पहलं से ज़्यादा लक्षण देखने को मिलते  हैं, गंभीर स्थिति हो सकती है और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

बच्चों को क्यों हो सकता है ज़्यादा ख़तरा?

इस वक्त, वयस्कों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी कोविड-19 मामलों में वृद्धि के लिए बहुत सारे कारक ज़िम्मेदार हैं। सावधानी बरतने में ढिलाई के साथ, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के खुलने की वजह से मामले तेज़ी से बढ़े हैं।

बच्चे, जो पिछले साल घरों में बंद रहे, अब वे बाहर निकल रहे हैं। खेलने की जगह पर अब ज़्यादा बच्चे दिखते हैं, बच्चों का ग्रुप, घूमना, स्वच्छता का ख्याल न रखना और मास्क अच्छे से न पहनना, संक्रमित होने का कारण बन रहे हैं।

किस तरह के संकेत और लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?

हार्वर्ड हेल्थ की एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बच्चे वायरस के कारण कई तरह से पीड़ित हो सकते हैं, कुछ में कोई लक्षण नहीं यानी एसिम्प्टमैटि या फिर बुखार जैसे लक्षण। कोरोना वायरस के क्लासिक लक्षण अब भी बुखार, सिर दर्द, खांसी और ज़ुकाम हैं।

हालांकि, जिस तरह मामाले बढ़ रहे हैं, सभी लोगों को सलाह दी जा रही है, कि स्वास्थ्य में किसी भी तरह का बदलाव या फिर लक्षण दिखने पर इंतज़ार न करें बल्कि फौरन टेस्ट करवाएं। बच्चों में कई बार वयसकों से अलग तरह के लक्षण दिख सकते हैं, जो ऐसे हो सकते हैं:

-लगातार बुख़ार आना

– त्वचा पर चकत्ते, पैरों की उंगलियों का लाल और सूजना

– आंखों का लाल होना

– शरीर में बेहद दर्द होना, जोड़ों में दर्द

-मतली आना, पेट में मरोड़ और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संबंधी तकलीफें

– लाल और फटे होंठ, चेहरे और होठों पर नीलापन

– चिड़चिड़ाहट

– नींद न आना, थकावट

कोवि-19 नवजात बच्चों को भी संक्रमित कर सकता है। बच्चों में लक्षणों को पहचानना मुश्किल है, लेकिन इस तरह के लक्षणों पर ध्यान दें:

– त्वचा के रंग का गहरा होना

– बुख़ार आना

– भूख न लगना, खाने को लेकर चिड़चिड़ापन

– उल्टी आना

-मांसपेशियों में दर्द होना

– होठों और त्वचा पर सूजन

– घाव और छाले आना

बच्चों के लिए वैक्सीन कब आएगी? 

बच्चों के लिए वैक्सीन आने में अभी वक्त लगेगा। इसे उपलब्ध होने में अभी कम से कम एक साल का वक्त लग सकता है। इस वक्त 16 साल से ज़्यादा की उम्र के बच्चों के लिए भले ही वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन बच्चों पर वैक्सीन के ट्रायल शुरू हो चुके हैं।

मॉडर्ना इस वक्त 2 से 12 साल के बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल कर रहा है, वहीं, Pfizer’s mRNA वैक्सीन, जिस पर भी शोध चल रहा है, अभी 100 प्रतिशत प्रभावी देखी गई है। छोटे बच्चों और शिशुओं पर भी ट्रायस और शोध की प्लानिंग है।

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